सोमवार, २ नोव्हेंबर, २०१५

हाशिया

हाशिया है
एक सच्चाई
मानो या ना मानो।

आश्स्वस्त है वो
जो बसता है हाशिये से दूर , 
गर्भस्तर पर
सुरक्षित घेरे में ...

और बनाता है हाशिया
असुरक्षित, उसे
जो रह जाता है किनारे पर
बचता हुआ भीड के रेले से …

हाशिया बसता है
हर मन में, किसी रूप में
छूआ नहीं जा सकता
महसूस होते रहता है .…


हाशिया है
एक सच्चाई
मानो या ना मानो।
- श्रीधर जहागिरदार

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